कुर्सी के "राम राज्य" मे "अच्छे दिन....."
अनिल अयान
प्रभु राम अयोध्या लौट आए हैं। राम राज्य आ गया है। अच्छे दिन तो पहले से ही आ चुके थे। अपनी दूसरी पंचवर्षीय में अच्छे दिन बहुत आएं हैं। भगवान राम जी आज भी अयोध्या में तंबू में निवास कर रहे हैं। अदालतें प्रभु राम को रामराज्य में भी रनिवास नहीं दिलवा सकीं। समय गुजरते ही अगले चुनाव तक यह मामला सरकारी दफ्तर के उस अलमारी में गायब हो जाता है जहां बाबू चपरासी और अधिकारियों को भी पसीना बहाना पड़ता है। अच्छे दिन इस तरह से है। कि देश की सत्तारूढ पार्टी की सीटें कम होकर भी मुखिया जी फादर आफ इंडिया के तमगे से प्रसन्न हैं। मन की बात में जनता जनार्दन को सियाचिन ग्लेशियर में स्वच्छता अभियान का संदेश दिया जाता है पर पुलवामा के शहीदों की शहादत को बिसरा भी दिया जाता है। स्वदेशी अपनाओ के संदेश के साथ साथ चाइना का बाजार और तिब्बत शरणार्थियों का बाजार पूरी ठंडक में लोगों को गर्मी देने का काम करता है।
अनिल अयान
प्रभु राम अयोध्या लौट आए हैं। राम राज्य आ गया है। अच्छे दिन तो पहले से ही आ चुके थे। अपनी दूसरी पंचवर्षीय में अच्छे दिन बहुत आएं हैं। भगवान राम जी आज भी अयोध्या में तंबू में निवास कर रहे हैं। अदालतें प्रभु राम को रामराज्य में भी रनिवास नहीं दिलवा सकीं। समय गुजरते ही अगले चुनाव तक यह मामला सरकारी दफ्तर के उस अलमारी में गायब हो जाता है जहां बाबू चपरासी और अधिकारियों को भी पसीना बहाना पड़ता है। अच्छे दिन इस तरह से है। कि देश की सत्तारूढ पार्टी की सीटें कम होकर भी मुखिया जी फादर आफ इंडिया के तमगे से प्रसन्न हैं। मन की बात में जनता जनार्दन को सियाचिन ग्लेशियर में स्वच्छता अभियान का संदेश दिया जाता है पर पुलवामा के शहीदों की शहादत को बिसरा भी दिया जाता है। स्वदेशी अपनाओ के संदेश के साथ साथ चाइना का बाजार और तिब्बत शरणार्थियों का बाजार पूरी ठंडक में लोगों को गर्मी देने का काम करता है।
शहरों, कस्बों और गांवों में स्वच्छता अभियान इतना तगड़ा है कि चौराहों में कचड़ा मुंह बना रहा है। राजनीति में में स्वच्छता अभियान इतनी तेजी चलाया जा रहा है विपक्ष अपने अस्तित्व की तलाश में व्यस्त हैं। छद्मयुद्ध में हरियाणा ने सत्तारूढ दल को सबक सिखा दिया है। जब से जम्मू काश्मीर और लद्दाख अलग हुए तब से धाराएं प्रवाहित हो रही हैं। जम्मू काश्मीर के राज्यपाल को धरती के स्वर्ग से भी स्थानांतरित कर दिया गया। एक तरफ जहां हर प्रदेश में कमल खिलाने की फिराक में गृहमंत्री पूरी तरह से व्यस्त हैं। अभी तक को सामान खरीदने बेचने के लिए बाजार सजता था पर अब तो सरकारों के बनने बिगडने के लिए एमपी एमएलए की बोलियां लग रही है। कहीं पर फिफ्टी का मामला चल रहा है। कुल मिलाकर लोकतंत्र का रामराज्य जारी है।
हम सबको इस रामराज्य में धर्म पंथ की भूल-भुलैया मे व्यस्त किया जा रहा है। स्मार्ट सिटी के नाम पर धन को समर्पित किया जा रहा है। मीडिया को दो किनारों की तरह पक्ष और विपक्ष में बांट दिया गया है। राज सेवक सामुद्र के किनारे स्वच्छता अभियान के महाअभियान में परम व्यस्त हैं। मीडिया इस ब्रेकिंग समाचार को जनहित में जारी करने में टीआरपी मैया के सामने नतमस्तक ह़ो चुकी है। मीडिया भी दो फांकों में बट चुका है। एक सत्तारूढ की चरण वंदना कर शौर्य गाथा गा रहा है। और दूसरा शौर्यगाथाओं के पीछे से नेपथ्य में छिपाए मुख्य मुद्दों को उजागर कर रहा है। चुनाव के समय पर ही विपक्ष दल की विधानसभा सरकारों पर आईबी और सीबीआई के छापे मारे जाते हैं और जेल का रास्ता दिखाया जाता है। त्योहारों के समय पर ही मिलावट और लाइसेंस का ध्यान आता। एक विभाग दूसरे विभागों की टांग खींचने में सबसे आगे रहते हैं। धर्म को अफीम बनाकर रोज की घुट्टी पिलाने में सत्तारूढ़ पूरी तरह से मुख्य धारा को छोड़ अपनी धारा को मुख्य बनाने की जुगत भिड़ा रहा है। धारा एक सौ चौवालिस के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का क्या हुआ यह जनता ना जान पाई। मीडिया ने इसको दिखाने से परहेज़ किया। कभी सावरकर, कभी सरदार पटेल कभी गांधी के नाम पर राजनीति के साइबर सेल सोशल मीडिया में रायता फैला देते हैं। दल दलदल में ही दलित राजनीति कुर्सी के राम राज्य लाने के लिए कर रहे हैं। धर्म की अफीम का नशा इतना तगड़ा है कि अमुक धर्म के एक भड़काऊ भाषण देने वाले धार्मिक सुधारक को सरे आम कत्ल कर दिया जाता है। और मीडिया उसके पीछे पड़ जाता है उसकी मां जिस मुख्यमंत्री को इसका गुनहगार मानती है, उसी से मिलने और उसी के माध्यम से जब नौकरी और मुआवजे का आदेश मिला तब पूरा परिवार उन्हे धन्यवाद देता है। अमुक और तमुक धर्म को लड़ाने में विभिन्न मीडिया और दल और राम राज्य पूरा प्रयास करते हैं। खींच तान के समय में सत्यता रूढ़ दल का मुखिया चालाकी से मौन धारण कर लेता है। जनता जनार्दन यह चालाकी भी बखूबी समझती है। जनता जानती है कि वो राम राज्य का सुख भोग रही है। जहां पर योजनाओं में लदे हुए वायदे हैं। वायदों के अच्छे दिन है।
चुनावी दौरों की बात हो, अच्छे दिन की बात हो, या मन की बात हो सभी में छिपा उद्देश्य विपक्ष को गरियाना, पड़ोसी देशों की खिल्ली उड़ाना, ढकोसला पूर्ण तथ्यों की बलि दे देना, मुख्य मुद्दों से भटकाना, अर्थव्यवस्था ,सुरक्षा रोजगार, कृषि और किसान के जमीनी हालात पर चुप्पी साध लेने का काम किया जा रहा है। जनता को नेताओं की लंगोट बनाकर लपेट लिया गया है। देश में हर शासकीय सेवा का प्राइवेटाइजेशन हो रहा है। जम्हूरियत की बात करने वालों को कारागार की सुविधा दी जा रही है। बाबरी मस्जिद और राम मंदिर तो अब निर्माण की आशा त्याग चुके हैं। सन चौदह और सन उन्नीस के चुनावी एजेंडे खाक छानने में मग्न हैं। देश आर्थिक, सामाजिक, सुरक्षात्मक और राजनैतिक अनुशासन पर्व मनाने में व्यस्त हैं। पर सब प्रसन्न हैं क्योंकि हम सब रामराज्य का सुख भोग रहे हैं। संजय सबकुछ बता रहा है आखिंन देखी। पर धृतराष्ट्र को केशव पर पूर्ण विश्वास है कि चाहे द्वापर हो त्रेता हो या कलयुग रामराज्य में अच्छे पर मंहगे दिन का सुख तो भोगना ही पड़ेगा। इस रामराज्य में सबकी मनोकामना पूरी हो रही है। सबको इसी का भ्रम है कि सरकार उसका ध्यान रख रही है। और यही भ्रम कुर्सी के रामराज्य के लिए अफीमाई घुट्टी है। जिससे सत्ता का, देश का, दल का और लोक सेवक का दंभ सम्मान अमिट बनेगा, यह कथा अनंत है और अभिप्राय और भी अनंत है। आइये सब मिलकर कर उद्घोष करें , बोलो प्रभु रामचंद्र की जय, सिया बलराम चंद्र की जय, राम राज्य अमर रहे,भारत देश अमर रहे। हम सबका कल्याण हो।।
चुनावी दौरों की बात हो, अच्छे दिन की बात हो, या मन की बात हो सभी में छिपा उद्देश्य विपक्ष को गरियाना, पड़ोसी देशों की खिल्ली उड़ाना, ढकोसला पूर्ण तथ्यों की बलि दे देना, मुख्य मुद्दों से भटकाना, अर्थव्यवस्था ,सुरक्षा रोजगार, कृषि और किसान के जमीनी हालात पर चुप्पी साध लेने का काम किया जा रहा है। जनता को नेताओं की लंगोट बनाकर लपेट लिया गया है। देश में हर शासकीय सेवा का प्राइवेटाइजेशन हो रहा है। जम्हूरियत की बात करने वालों को कारागार की सुविधा दी जा रही है। बाबरी मस्जिद और राम मंदिर तो अब निर्माण की आशा त्याग चुके हैं। सन चौदह और सन उन्नीस के चुनावी एजेंडे खाक छानने में मग्न हैं। देश आर्थिक, सामाजिक, सुरक्षात्मक और राजनैतिक अनुशासन पर्व मनाने में व्यस्त हैं। पर सब प्रसन्न हैं क्योंकि हम सब रामराज्य का सुख भोग रहे हैं। संजय सबकुछ बता रहा है आखिंन देखी। पर धृतराष्ट्र को केशव पर पूर्ण विश्वास है कि चाहे द्वापर हो त्रेता हो या कलयुग रामराज्य में अच्छे पर मंहगे दिन का सुख तो भोगना ही पड़ेगा। इस रामराज्य में सबकी मनोकामना पूरी हो रही है। सबको इसी का भ्रम है कि सरकार उसका ध्यान रख रही है। और यही भ्रम कुर्सी के रामराज्य के लिए अफीमाई घुट्टी है। जिससे सत्ता का, देश का, दल का और लोक सेवक का दंभ सम्मान अमिट बनेगा, यह कथा अनंत है और अभिप्राय और भी अनंत है। आइये सब मिलकर कर उद्घोष करें , बोलो प्रभु रामचंद्र की जय, सिया बलराम चंद्र की जय, राम राज्य अमर रहे,भारत देश अमर रहे। हम सबका कल्याण हो।।
अनिल अयान।