व्यंग्य आलेख
हर बात में थू-थू करने की परंपरा
अपना देश वैश्विक और जैविक महाआपदा की वजह से इक्कीस
दिन के लॉक डाउन में अपने अपने घरों में आराम फरमाएगा, ऐसा पूरा देश सोचता है, शासन
प्रशासन देश की जनता को ऐसा करने के लिए हर सुविधा मुहैया कर रहा है, ताकि हम खुद को
एक दूसरे से सामाजिक और भौतिक रूप से अलग कर सकें और कोविड़ उन्नीस की संक्रमण चैन को
अलग कर सकें, देश की जनता को हर तरह से आधात्म और मनोरंजन से जॊड़ने के लिए रामायण महाभारत,
चाणक्य, शक्तिमान जैसे धारावाहिक दूरदर्शन मुफ्त में दिखा रहा है ताकि हम मानसिक रूप
से विचलित ना हो जाएँ, अपने दैनिक उपयोग की सामग्रियों और अन्य सुविधाओं के लिए सरकार
ने निशेधाज्ञा की घोषणा भी नहीं की ताकि हमें कोई दिक्कत ना हो, हमें आवश्यक काम से
बाहर निकलने के लिए भी आजादी भी कुछ समय के लिए सरकार ने दे दिया, परन्तु हमारा खुराफाती
दिमाग हर बात में कमी निकालने की आदत से बाज नहीं आ रहा है, हर बात में मीनमेख निकालने
पर तुला है, हर बात पर थू-थू करके सरकार और शासन की व्यवस्थाओं की बेइज्जती करने पर
हम तुले हुए हैं, इसका सबसे बेहतर माध्यम है सोशल मीडिया। कुछ भी होगा हम खुद के चेहरे
को लाइव दिखाकर थू-थू करने लग जाएगें। जनता कर्फ्यू से आज तक का अवलोकन करने पर समझ
में आता है कि शाबासी देने वाले लोग कम हैं और मुँह में थूकने वाले लोग ज्यादा ही हमारे
देश में रहते हैं। आइये देखें जरा कैसे हमारे देश के ये बीमार देश की विभिन्न स्थितियों
और निर्णयों में थू थू करने की परंपरा का निर्वहन किया। इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष
भी पीछे नहीं रहा।
हमारा देश
में कोरोना संक्रमण का खतरा जब महसूस हुआ तो, प्रारंभ से ही, सेनीटाइजेशन, हाथ धुलने,
और मास्क लगाने की बात जब शासन से सभी तक पहुँचाई तो हम लोगों ने इस बात पर थू-थू किया
कि लोगों को बच्चों वाली बाते अब सरकार से सीखना होगा, सरकार, खिलाड़ी, अभिनेता बताएगें
कि हाथ कैसे धोना है, माननीय प्रधानमंत्री जी ने जनता कर्फ्यू लगाया और और शाम को पांच
बजे शंख, थाली या घंटे बजाने का आह्वान किया ताकि हमारे कर्मवीर चिकित्सक, पुलिस, बिजली
विभाग, सफाईकर्मी, के प्रति सम्मान दर्शाया जा सके, लोग उस पर भी थू-थू करने लगे, इस
निर्णय के बाल की भी खाल निकालने लगे, कमिया बताने लगे और अंधविश्वासी का तमगा प्रधानमंत्री
को सौंप दिये, एक दो दिन के बाद देश में लॉक डाउन की घोषणा इक्कीस दिन के लिए जब प्रधानमंत्री
जी ने किया तो पूरा देश सकपका गया, कुछ बुद्धिजीवियों को इस बात का भान हो गया था किंतु
अधिक्तर जनता सकते में आ गई, हमारे देश के दूसरे अनुशासन पर्व में अनुशासन की बलि चढ
गई, इसकी वजह बेरोजगारी, भूख, परदेश की बेरहमी, और यातायात का बंद हो जाना था, सरकार
ने बुद्धिजीवियों की तरह गरीबों पर भी आखिरकार इस तरह थू थू कर दिया, दिखाने के दाँत
और खाने के दांत और वाली सरकार ने मजदूरों और पलायन करने वालों पर ऐसा थूका कि वो सैकडों
किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर हो गए, सरकार ने अपने निर्णय से इन बेसहारों पर थूका तो
सोशल मीडिया में तथाकथित टुकडे-टुकड़े गैंग ने सरकार पर थू-थू किया। जल्दबाजी में थू-थू
बढी तो सरकार ने इनके लिए कुछ रहमदिली दिखाई, उसमें भी सोशल मीडिया के कर्मवीर वीरता
भरी थू-थू कर डाली।
मरकज में
मुस्लिम संप्रदाय का पूरा का पूरा कुनबा कोरोना संक्रमित पाया गया, मौलाना या अनुयाइयों
तक जाने अनजाने ने देश भर में कोविड का संक्रमण फैलाया, डाक्टरों और नर्सों पर अश्लील
हरकतें की, उनके मुंह में थूका, आइशोलेशन सेंटर में अपनी सभ्यता का परिचय नंगे होकर
दिया, इसी समुदाय ने डाक्टर्स की टीम को दौड़ा दौड़ा कर पीटा, अब इससे बड़ी थू-थू दिल्ली
सरकार और केंद्र सरकार की भला क्या हो सकती थी, और तो और मीडिया को जिसे पहले से सिर्फ
एक दूसरे पर थूकने और थूक कर चाटने की पुरातन बीमारी है उसने सरकार, मुस्लिम संप्रदाय,
शासन प्रशासन की उन्हीं के साये में रहकर खूब थू थू किया। मै इस समुदाय पर थू-थू नहीं
कर रहा, क्योंकि इसमें कई बहुत ही नेक दिल के लोग हैं जो अपने मित्र हैं, किंतु कुछ
मुट्ठी भर लोगों की थू-थू ने पूरे संप्रदाय के सम्मान में काला धब्बा लगा दिया। जिनको
जनता को जागरुक करने की जिम्मेवारी दी गई वो भी मौका परस्त होकर एक दूसरे के मुंह में
सिर्फ थू-थू बस नहीं किए बल्कि थूकने से भी बाज नहीं आये, और तो और इस आपातकाल में
जब हमारे कलाकार, साहित्यकार, खिलाड़ी, रंगमंचीय लोग, राजनेता, देश में समाजसेवा, दानवीरता
का परिचय दे रहे हैं, और फोटो खिंचाकर पूरी दुनिया में अपने द्वारा किए कार्यों का
प्रदर्शन कर रहे हैं, पीएम केयर्स की जमा की
गई धनराशि की रशीदों में लाइक और कमेंट्स बटॊर रहे हैं, उन्हें हम किस श्रेणी में रखें
यह हम सब खुद निर्णय लें, ।
जहाँ पर
पूरा देश इस जंग में प्रधानमंत्री जी को अपना नेतृत्व मानकर उनकी बात पर रात में नौ
बजे नौ मिनट के लिए लाइट बंदकर सम्मान के लिए दिए टार्च या मोबाइल की लाइट जलाकर आभार
व्यक्त किया, कर्मवीरों के प्रति सम्मान व्यक्त किया, उस बीच कई लोग प्रधानमंत्री जी
से भी आगे निकल कर पटाखे फोड़े, डीजे फ्लोर्स में नाचे गाए, चैत में दीवाली मनाये, यह
भी उसी श्रेणी का कार्य किया गया। इस बीच बहुत से सोशल मीडिया के कर्मवीर जो दसवी पास
थे वो विद्युत विभाग के अभियंताओं की भांति विद्वान बनकर आपस में तूतू-मैमैं और थू-थू
करने में लगे रहे। थू-थू करने वाले लोग, या मुँह पर थूकने वाले लोग यह भूल जाते हैं
कि इससे उनकी परंपरा का भी बोध होता है, समय कुसमय थूक कर चाटना इसी परंपरा का एक भाग
रहा है। हम भारत के वासी हैं और हमें अपने विचार रखने का पूरा अधिकार संविधान ने दिया
है, इस तथ्य को लेकर हमें यह भी अधिकार मिल जाता है कि हम अपनी विद्वता के आवेश में
आकर एक दूसरे के मुंह में थू-थू करते रहें और इस तरह अपनी मूर्खता का परिचय देते रहें।
ये तो कुछ उदाहरण है, जो मैने अपने ऊपर थू-थू करवाने के लिए आप सबके सामने रखे, लेकिन
इस परंपरा से ही हमारा देश महान बन रहा है, विकासशील होने में हमारी थू-थू करने की
परंपरा का भी बहुत योगदान है। जिस पर सभी को गाहे बगाहे गर्व कर लेना चाहिए।
अनिल अयान
९४७९४११४०७