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Thursday, 19 March 2020

मूर्खिस्तान के मूर्खाधिराज अनिल अयान

मूर्खिस्तान के मूर्खाधिराज
अनिल अयान

विश्व में एक विशेष देश है, मूर्खिस्तान, वहाँ पर विश्वभर के मूर्ख निवास करते हैं, और मूर्खता करके मन ही मन प्रसन्न होने की मूर्खता करते हैं। यहाँ पर मूर्खों की सरकार मूर्खों के द्वारा और मूर्खों के विकास के लिए बनाई जाती है, मूर्खता के लिए देश में राष्ट्रीय मूर्ख पर्व का आयोजन हर वर्ष किया जाता है, उस दिन उस देश के मूर्खाधिराज और सारे मूर्ख नागरिक अपनी सर्वश्रेष्ठ मूर्खता का प्रदर्शन करते हैं, इस आयोजन में मूर्खता की सवश्रेष्ठ प्रस्तुति के लिए बनाए गए निर्णायक भी मूर्खों में सर्वश्रेष्ठ होते हैं, जीतने वाले को मूर्ख श्री, मूर्ख विभूषण, मूर्ख रत्न और मूर्ख भूषण की उपाधि दी जाती है। यहाँ के संविधान को निर्मित करने वाली सविंधान निर्माण समिति में भी देश के सर्वश्रेष्ठ मूर्खों का पैनल बनाया जाता है। इससे यह तो निश्चित होता है कि इस प्रकार के संविधान के किसी भी नियम को कोई भी मूर्ख नेता राज सभा में अपने स्वार्थ के लिए इस संविधान को मूर्खता का प्रदर्शन करके और बहुमत जुटाकर बदल सकता है।
इस मूर्खिस्तान में मूर्खाधिराज का चुनाव भी बड़े हे दिलचश्प अंदाज में होता है, पहले तो नागरिकों के बीच में मूर्ख नेता अपनी मूर्खतापूर्ण भाषणबाजी करता है, फिर मूर्ख नागरिक अपने मूर्ख नेता को कान मुरेर कर वोट देते हैं, चुनाव अधिकारी इन मूर्ख नेताओं से विभिन्न मूर्ख गवाहों के बीच में कान मुरेरने की संख्या पूछकर निश्चित करता है कि जिस मूर्ख नेता के सबसे ज्यादा कान मुरेरे जाते हैं उसे राज सभा में भेजा जाता है, विभिन्न प्रदेशों से आए मूर्ख प्रतिनिधि अपने मूर्खाधिराज बनाते हैं, जो प्रतिनिधि अपनी पीढ़ में सबसे ज्यादा घूंसे सह लेता है वो मंत्री बनता है, और जो सबसे देर तक मुर्गा बनकर अपनी मूर्खता की नुमाइस करता है वो मूर्खाधिराज बनता है। सबसे उम्रदराज मूर्ख राजनेता इस राज सभा का सभापति बनाया जाता है, जिसे सारे मूर्ख नेता प्रतिनिधि और मूर्खाधिराज मुर्गा बनकर सम्मान देते हैं। यहाँ पर मूर्खता को विश्व विख्यात करने वाले उत्पादों की फैक्ट्रियाँ, उद्योग, सर्विस सेक्टर, और शिक्षा के लिए विद्यालय महाविद्यालय और विश्वविद्यालय खोले गए, इन सब में सिर्फ मूर्खता को राष्ट्रीय लक्ष्य बनाकर, मूर्खता की सर्वश्रेष्ट विकास दर को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास किया जाता है।
मूर्खता के लिए देश में राष्ट्रीय मूर्ख पर्व का आयोजन हर वर्ष किया जाता है, इस में सब लोग एक दूसरे को मूर्ख बनाने की असफल कोशिश करते हैं क्योंकि मूर्खों को मूर्ख बनाने में सफलता प्राप्त करने वाला सबसे बड़ा पढा लिखा माना जाता है। जिसे मूर्ख नागरिक हसी का पात्र बना देते हैं इस लिए असफल कोशिश करने वाले सर्वश्रेष्ठ नागरिक को जीतने पर मूर्ख श्री, मूर्ख विभूषण, मूर्ख रत्न और मूर्ख भूषण की उपाधि दी जाती है। इस देश की न्याय प्रणाली में भी मूर्खाधीश बैठे होते हैं, जो मूर्ख नेताओं की सुनवाई करने में तो मिनट भी नहीं लगाते किंतु बहन बेटियों के ऊपर होने वाले अत्याचार, और किसानों मजदूरों पर होने वाले अपराधों में न्याय देने पर वर्षों तक विचार करने की सर्वश्रेष्ठ मूर्खता करने से बाज नहीं आते। इस देश में उल्लू बनाने पर आधारित विभिन्न फिल्मों का निर्माण किया जाता है। और सिनेमाघरों में नागरिकों को निःशुल्क दिखाया जाता है। यह भी एक राष्ट्रीय मूर्खतापूर्ण कर्तव्य ही है।
यहाँ के युवाओं को मूर्खाधिराज नौकरी नहीं देते, वो सोचते हैं कि कहीं होनहार युवा अपनी मूर्खता का परिचय देकर उनका पद ना हथिया लें, इसलिए उन्हें पकोड़े तलने और अच्छे दिन के शेखचिल्ली वाले स्वप्न लोक का भ्रमण करने का आदेश दे दिया जाता है। यहाँ के होनहार मूर्ख युवा दिन भर मोबाइल और सोशल मीडिया में अपनी मूर्खता के एक से एक प्रदर्शन करते हैं और लाइक तथा कमेंट से मंत्रमुग्ध रहते हैं, खाली समय में पकोड़े तलते हैं और मूर्खाधिराज का जयकारा लगाते हैं। मूर्खाधिराज इस बात पर खुश हैं कि पूरे विश्व से उनके देश में विभिन्न किस्म के मूर्ख आते हैं, पर्यटक स्थलों में जाते हैं, और मूर्खिस्तान की मूर्खता की ऐतिहासिक इमारतें देखते हैं, और इस तरह पूरे विश्व में प्रचार प्रसार करते हैं। इस देश में विद्वता, होशियारी, चालाकी, ज्ञानी होना राष्ट्रीय अपराध माने जाते हैं, इसके लिए मृत्युदंड ही एक मात्र सजा है, इस प्रकार के अपराधों के लिए कोई भी दया याचिका का प्रावधान नहीं है। मूर्खाधिराज ऐसे मामलों में अपराधियों को मुर्गा बनाकर बेइज्जत किया जाता है। इस देश में अन्य देश न कोई आतंकवाद फैलाते हैं, ना कोई कब्जा करते हैं, ना ही इनको अपना गुलाम बनाना चाहते हैं।
विश्व में विभिन्न देशों में मूर्खाधिराज के पुतले बनाए जाते हैं और पुतले के सामने मूर्खिस्तान के इस मूर्खाधिराज के मूर्खतापूर्ण शासन के किस्से स्वर्णाक्षरों से लिखे गए होते हैं। पूरा विश्व मूर्खिस्तान को विश्व का नौंवा अजूबा मानते हैं। विश्व के पूरी देश जहाँ अपनी बुद्धिमानी से देश को गतिशील बनाते हैं, देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं वहीं यह देश अपनी मूर्खता से देश को गतिशील बनाए हुए है। इससे बड़ी अचंभित करने वाली घटना विश्व में कभी कभी घटित होती है। इसलिए यह विश्व के लिए किसी अजूबे से कम नहीं है। विश्व भर के विश्वविद्यालयों के स्कालर्स इस देश में मूर्खता पर शोध करने आते हैं, और मूर्खता पर पीएचडी, डीलिट और डीएससी करके जाते हैं।  इस देश में मूर्खता, मूर्खता और मूर्खता का की वास है, पूरा विश्व इन्हें मूर्ख समझने की मूर्खता कर रहा है। परंतु ये अपनी मूर्खता को ही ईश्वर का सबसे बड़ा उपहार और वरदान मानते हैं। जहाँ पूरा विश्व आपसी मारामारी में और एक दूसरे की सुखशांति छीनने में संघर्षरत हैं, एक दूसरे के धर्म को नीचा दिखाने के लिए आपसी कलह का कारण बना है, वहाँ ऐसे मूर्खिस्तानों और मूर्खाधिराजों की मूर्खता पूरे विश्व के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। हम सबको इनकी मूर्खता पर गर्व है। इनकी मूर्खता महान है, इस देश की शान है, और इसी शान पर पूरा विश्व कुर्बान है।

अनिल श्रीवास्तव "अयान"
श्रीराम गली, दीपशिखा स्कूल के पास
सतना म.प्र.
9479411407
ayaananil@gmail.com

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